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Gk dunia – जानें पहली बार अंग्रेज कब और क्यों भारत आये थे?

gk dunia – भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी company की स्थापना 1600 में हुई थी. इस कंपनी की स्थापना के साथ ही india में अंग्रेजों ने अपने पैर फ़ैलाने शुरू कर दिए थे. इसी के साथ india यूरोपीय देशों के लिए सबसे प्रमुख व्यापारिक केंद्र बन गया और यूरोपीय देशों में यहां के मसालों के busnass पर एकाधिकार स्थापित करने की महत्वाकांक्षा बढ़ती चली गई, जिसके परिणामस्वरूप कई नौसैनिक युद्ध भी हुए थे.

ब्रिटिश ईस्ट कंपनी company का गठन कैसे हुआ?

How was the British East Company formed?

दक्षिण व दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों के साथ व्यापार करने के लिए 1600 ई. में जॉन वाट्स और जॉर्ज व्हाईट द्वारा ब्रिटिश जॉइंट स्टॉक कंपनी, जिसे ईस्ट इंडिया कंपनी के नाम से जाना जाता है, की स्थापना की गयी थी। प्रारंभ में इस जॉइंट स्टॉक कंपनी के शेयरधारक मुख्य रूप से ब्रिटिश व्यापारी और अभिजात वर्ग के लोग थे और est india company का ब्रिटिश goverment के साथ कोई सीधा संबंध नहीं था।

अंग्रेजो का भारतीय उपमहाद्वीप में आगमन
‘British arrived in the Indian subcontinent’

24 agust , 1608 को व्यापार के उद्देश्य से bharat के सूरत बंदरगाह पर अंग्रेजो का आगमन हुआ था, लेकिन 7 year के बाद सर थॉमस रो (जेम्स प्रथम के राजदूत) की अगवाई में अंग्रेजों को surat में कारखाना स्थापित करने के लिए शाही फरमान प्राप्त हुआ। इसके बाद, est india को madras में अपना दूसरा कारखाना स्थापित करने के लिए विजयनगर साम्राज्य से इसी प्रकार का शाही फरमान प्राप्त हुआ था।

अंग्रेजों ने अपनी कूटनीति के माध्यम से अन्य यूरोपीय व्यापारिक कंपनी को india से बाहर खदेड़ दिया और अपने व्यापारिक संस्थाओं का विस्तार किया। अंग्रेजों द्वारा भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में कई व्यापारिक केंद्र स्थापित किए और kolkatta, बॉम्बे और मद्रास के आसपास ब्रिटिश संस्कृति को विकसित किया गया। अंग्रेज मुख्य रूप से रेशम, नील, कपास, चाय और अफीम का busness करते थे।

busness के दौरान अंग्रेजो ने देखा कि india समाजिक, राजनीतिक और आर्थिक तौर पर बिलकुल ही अस्त-व्यस्त है तथा लोगों में आपसी मतभेद है और इसी मतभेद को देखकर अंग्रेजो ने india पर शासन करने की दिशा में सोचना प्रारंभ किया था .

gk dunia -सन 1750 के तक ईस्ट india कंपनी ने indian politics में हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया था। 1757 में प्लासी की लड़ाई में रॉबर्ट क्लाईव के नेतृत्व में ईस्ट इंडिया कंपनी ने बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला को पराजित कर दिया था . इसके साथ ही भारत में est. india company का शासन स्थापित हो गया था.

अंग्रेजों के खिलाफ भारत में स्वतंत्रता क्रांति
Independence revolution in India against the British

भारत की उपमहाद्वीप के सीमा चौकी पर 17वीँ शताब्दी के दौरान कुछ यूरोपियन व्यापारियों द्वारा प्रवेश किया गया था और अंतत: ब्रिटीश ईस्ट इंडिया company ने india को विशाल सैनिक शक्ति के कारण गुलाम बना लिया. 18वीं शताब्दी तक भारत में अंग्रेजों ने अपना आदिपत्य स्थापित कर लिया था. देखा जाए तो 1857 में ही अंग्रेजों के खिलाफ भारत में स्वतंत्रता क्रांति की start हो चुकी थी. इस विद्रोह को सिपाहीयों का विद्रोह, 1857 का विद्रोह इत्यादि कहा जाता है. इस विद्रोह के द्वारा (1858 का अधिनियम भारत सरकार), भारत को नियंत्रण मुक्त करने का एहसास ब्रिटीश को भारतीय स्वतंत्रता सेनानीयों ने दिलाया था.

indian nation congress अधिवेशन 1929 लाहौर में हुआ था जहां पर भारत ने पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी. 1930 से 1947 के बीच कई आंदोलन हुए जिनमें से एक है सविनय अवज्ञा आंदोलन जिसे गांधी जी ने 1930 में start किया था जिसका अर्थ है बिना हिंसा के किसी भी goverment आदेश की अवहेलना करना.

हम आपको बता दें कि second world युद्ध के बाद 1947 में ब्रिटिश सरकार आश्वस्त हो चुकी थी कि वो अब लंबे time तक india को अपनी शक्ति नहीं दिखा सकेगी. india के स्वतंत्रता सेनानी लगातार अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर विवश कर रहे थे और स्वतंत्रता की लड़ाई को डट के लड़े. Bharat को मुक्त करने का फैसला आखिरकार अंग्रेजों ने ले लिया था.

current affairs gk dunia लॉर्ड लुईस माउंटबेटन

के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड लुईस माउंटबेटन को ब्रिटिश संसद ने 30 जून 1948 तक भारत में सत्ता-हस्तांतरण का दायित्व सौंपा था. सी राजगोपालचारी के अनुसार अगर माउंटबेटन ने 30 जून 1948 तक इंतजार किया होता तो उनके पास हस्तांतरित करने के लिए कोई सत्ता नहीं बचती. इसलिए माउंटबेटन ने अगस्त 1947 में ही ये दायित्व पूरा कर दिया था.

ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमंस में माउंटबेटन की भेजी गई सूचनाओं के आधार पर इंडियन इंडिपेंडेंस बिल 4 जुलाई 1947 को पेश किया गया था. इस विधेयक को ब्रिटिश संसद ने तुरंत पारित कर दिया और इसके अनुसार मोहम्मद अली जिन्ना Pakistan के प्रथम गवर्नर जनरल बने जबकि पंडित जवाहर लाल नेहरु आजाद भारत के FIRST PRIME MINISTER. दिल्ली, देश की राजधानी में इस दिन समारोह रखा गया जहां नेता, स्वतंत्रता सेनानियों इत्यादि ने भाग लिया और आजादी का जश्न मनाया.15 अगस्त 1947 को भारत में ब्रिटिश राज समाप्त होना तय हुआ. हालाकि Bharat की आजादी के बाद हिन्दू-मुस्लिम दंगों के कारण India and Pakistan अलग होकर दो स्वतंत्र-उपनिवेश बने जिन्होंने ब्रिटिश कॉमनवेल्थ के तहत रहना स्वीकार किया.

क्या आप जानते हैं की जब भारत आजाद हुआ था तब भारत की 500 से ज्यादा रियासतों का भविष्य भी नए देशों पर छोड़ दिया गया था. इन रियासतों को india and Pakistan में से किसी एक को चुनना था. कई रियासतें 15 अगस्त 1947 से पहले भारत या पकिस्तान का हिस्सा बन गई और कई आजादी के बाद भी किसी भी देश में शामिल नहीं हुई.

भारत में स्वतंत्रता दिवस का क्या महत्व है और इसका क्या प्रतीक है?
What is the importance of Independence Day in India and what does it symbolize?

इस दिन bharat में पतंग उड़ाई जाती हैं और ये खेल स्वतंत्रता दिवस का प्रतीक है और दूसरा प्रतीक स्वतंत्रता दिवस का delhi का लाल किला है जहां हर साल इस दिन bharat के PM तिरंगा फहराते हैं. 15 agust भारत को ब्रिटिश शासन से आजादी प्राप्त हुई थी जिसकी याद में स्वतंत्रता republic day मनाया जाता है. हर साल पूरे उत्साह के साथ ये दिन मनाया जाता है.

ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि भारत के गणराज्य ने 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों के शासन से अपनी स्वतंत्रता प्राप्त की. तब से, 15 अगस्त को  ब्रिटिश सरकार से आजादी मिलने के उपलक्ष में भारत में स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है. भारत के लिए, 15 अगस्त अपने पुनर्जन्म का दिन है, एक नई शुरुआत है.gk dunia

song lyrics ;- tujhe kitna chahne lage hum

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